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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दौरे से पहले अमेरिका से भारत की बड़ी डील पर जल्द लगेगी मुहर

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दौरे से पहले अमेरिका से भारत की बड़ी डील पर जल्द लगेगी मुहर

नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दौरे से पहले भारत ने नौसेना के लिए मल्टीरोल हेलिकॉप्टर खरीदने की 2 अरब डॉलर की डील को मंजूरी दे दी है। अमेरिका ने भी राजधानी की वायु सीमा को सुरक्षित करने के लिए मिसाइल शील्ड सिस्टम की पेशकश की है। अमेरिका से 24 एडवांस्ड MH 60 ‘रोमियो’ हेलिकॉप्टर की यह डील नौसेना के लिए अहम है क्योंकि उसके कुछ जहाज जल्द ही समुद्र में उतरने वाले हैं, लेकिन इनके लिए एक सक्षम हेलिकॉप्टर अभी मौजूद नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि इस कॉन्ट्रैक्ट पर ट्रंप के दौरे के दौरान हस्ताक्षर किए जाएंगे। अडवांस्ड हेलिकॉप्टर से युद्धपोत को दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने में मदद मिलती है। ऐसे हेलिकॉप्टर न होने के कारण नौसेना के पास हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बियों का पता लगानेकी क्षमता कम है। नौसेना को 120 से अधिक नेवल मल्टी रोल हेलिकॉप्टर की जरूरत है। नौसेना ने इसके लिए अगस्त 2017 में ग्लोबल रिक्वेस्ट जारी की थी। लेकिन यह मामला आगे नहीं बढ़ सका था।

अमेरिका की ओर से भारत को नेशनल एडवांस्ड सरफेस टु एयर मिसाइल सिस्टम (NASAMS) देने पर भी प्रगति हुई है। इस सिस्टम से राजधानी की हवा के जरिए सभी खतरों से सुरक्षा की जा सकेगी। इस सिस्टम की वैल्यू लगभग 1.8 अरब डॉलर की है। इस डील के बारे में अमेरिकी कांग्रेस को सूचना दी गई थी।

सूत्रों ने बताया कि यह डील जल्द हो सकती है। इसके लिए लेटर ऑफ एक्सेपटेंस (LOA) अमेरिका की ओर से जारी हो गया है। सूत्रों ने बताया, ‘अमेरिका ने LOA जारी कर दिया है। हम राजधानी की सुरक्षा के लिए एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम हासिल करने के करीब पहुंच गए हैं।’

भारत की ओर से हस्ताक्षर किए जाने के बाद LOA एक कॉन्ट्रैक्ट बन जाएगा। यह प्रक्रिया कुछ सप्ताह में पूरी हो सकती है। भारत ने अमेरिका से 18 अरब डॉलर से अधिक के डिफेंस इक्विपमेंट खरीदे हैं और मिलिस्ट्री लॉजिस्टिक्स साझा करने के लिए कुछ एग्रीमेंट किए हैं। भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा मिलिट्री ट्रेनिंग पार्टनर भी है।

कुछ दशक पहले तक भारत डिफेंस इक्विपमेंट की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस से खरीदता था। लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका से इन इक्विपमेंट की खरीदारी बढ़ी है।

एशिया में चीन की बड़ी ताकत के मद्देनजर अमेरिका सामरिक संतुलन बरकरार रखने के लिए भारत की क्षमता बढ़ाना चाहता है। इसी वजह से उसने भारत को डिफेंस इक्विपमेंट की बिक्री बढ़ाई है और वह टेक्नोलॉजी के लिहाज से भी इस एरिया में मदद कर रहा है।

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