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मध्यप्रदेश की राजनीति का गुरुग्राम होटल में हाइ वोल्टेज ड्रामा, कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया विधायकों को जबरन कैद करने का आरोप

मध्यप्रदेश की राजनीति का गुरुग्राम होटल में हाइ वोल्टेज ड्रामा, कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया विधायकों को जबरन कैद करने का आरोप

गुरुग्राम: मध्य प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच विधायकों की खींचतान का मिड नाइट शो गुरुग्राम के मानेसर के ITC रिजॉर्ट में देखने मिला. एमपी में कांग्रेस सरकार के कई विधायक जिनमें बाहर से समर्थन दे रहे निर्दलीय और सपा-बसपा के विधायक भी शामिल हैं, उन्हें देर रात गुड़गांव के एक होटल में देखा गया.

जानकारी मिलते ही कांग्रेस अलर्ट हो गई. सभी विधायकों से संपर्क किया गया. बाद में मध्य प्रदेश के मंत्री जयवर्धन सिंह और जीतू पटवारी बहुजन समाज पार्टी की निलंबित विधायक रमाबाई के साथ गुरुग्राम के आईटीसी होटल से बाहर निकले. इस बीच विधायकों और वहां मौजूद लोगों में बहस भी हुई.

कमलनाथ सरकार पर कोई खतरा नहीं- जयवर्धन सिंह

होटल से विधायकों को लेकर लौटे जयवर्धन सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमारे विधायकों को बड़ी रकम का ऑफर देकर खरीद रही थी. हालांकि हमने अपने विधायकों को होटल से बाहर निकाल लिया है. अब मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर कोई खतरा नहीं है.

दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को बीजेपी पर लगाया आरोप

बता दें कि मंगलवार को सुबह ही कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार को गिराना चाहती है. दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि बीजेपी पैसे देकर विधायकों को खरीदना चाहती है. दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी के एक अन्य वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा 25-35 करोड़ रुपये देकर कांग्रेस के विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं.

इस बारे में खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है. कमलनाथ ने यह भी कहा कि उन्होंने तो अपने विधायकों से कहा है कि अगर फ्री में पैसा मिलता है तो ले लो. बता दें, पिछले साल जुलाई में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने राज्य विधानसभा में कमलनाथ सरकार पर हमला करते हुए कहा था, ‘ऊपर से आदेश है. तुम्हारी सरकार नहीं बचेगी.’

वहीं दिग्विजय सिंह ने कहा,” बीजेपी के रामपाल सिंह, नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया, संजय पाठक उन्हें पैसे देने वाले थे. अगर कोई छापा पड़ा होता तो वे पकड़े गए होते. हमें लगता है कि 10-11 विधायक थे. केवल 4 अब भी उनके साथ हैं, वे भी हमारे पास आएंगे.”

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