Select your Language: हिन्दी
India

बीजेपी ने विधायकों को टूटने के डर से चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली बुलाया

बीजेपी ने विधायकों को टूटने के डर से चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली बुलाया

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार खतरे में आ चुकी है. 22 विधायक कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके हैं. वहीं देर रात भोपाल से दिल्ली होते हुए गुरुग्राम तक सियासी हलमल मचती रही. देर रात बीजेपी के 106 विधायक भोपाल से प्लेन के जरिए दिल्ली आए. दिल्ली एयरपोर्ट पर बस से विधायकों को गुरुग्राम ले जाया है. ग्रुरुग्राम में सभी विधायकों को एक होटल में ठहराया गया है. बीजेपी विधायकों के साथ कैलाश विजयवर्गीय भी दिल्ली आए हैं. भोपाल एयरपोर्ट पर विधायकों से मिलने शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचे. बीजेपी के 106 विधायक गुरुग्राम के ITC ग्रैंड भारत होटल में ठहरे हैं.

कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है और बेंगलुरु के रिसॉर्ट में ठहरे हैं. वहीं बीजेपी पूरी प्लानिंग और तैयारी के साथ हर कदम उठा रही है. ऑपरेशन लोटस में कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए इसके लिए बीजेपी ने अपने विधायकों को मध्य प्रदेश से बाहर भेजा है.

एमपी में सियासी संकट को लेकर राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और राजभवन पहुंचने के बाद कोई फैसला लेंगे. वहीं कांग्रेसी विधायकों के इस्तीफे को लेकर विधानसभा स्पीकर ने कहा है कि हम पहले वेरीफाई करेंगे उसके बाद उसपर कोई फैसला लेंगे. बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के 22 बागी विधायकों में से 19 विधायकों के इस्तीफे स्पीकर को सौंपे हैं.

सिंधिया का अगला रुख क्या होगा?

सूत्रों ने बताया कि सिंधिया 12 मार्च को अपने समर्थकों और कांग्रेस के कई विधायकों के साथ बीजेपी का दामन थाम सकते हैं. सूत्रों ने यह भी बताया कि बीजेपी में शामिल होने से पहले सिंधिया ग्वालियर में अपने समर्थकों को संबोधित कर सकते हैं.

क्या है विधानसभा का गणित

मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं और इसमें से दो सीट खाली है. अब तक 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दिया है. ऐसे में अगर विधायकों का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है तो इसकी कुल संख्या 206 हो जाती है. बहुमत के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी. कांग्रेस के 22 नेताओं के इस्तीफे के बाद इस समय उसके विधायकों की संख्या 93 है. बीजेपी के पास 107 विधायक हैं और सूबे में अन्य दलों के सात विधायक हैं. कमलनाथ को विधानसभा सत्र शुरू होने के बाद अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ सकता है.

Related Articles

Back to top button