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मध्य प्रदेश सियासी घमासान के बीच आधी रात को राज्यपाल से मिले कमलनाथ, फ्लोर टेस्ट पर अभी भी सस्पेंस बरकरार

भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत का आज अहम दिन है. राज्यपाल ने कमलनाथ को आज बहुमत हासिल करने को कहा है, हालांकि स्पीकर ने इस पर कोई फैसला अब तक नहीं लिया है. विधानसभा की आज की कार्यसूची में भी फ्लोर टेस्ट का जिक्र नहीं है. वहीं बीती रात एमपी की सियासत रतजगा देखने को मिला. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आधी रात में राज्यपाल से मुलाकात की.

कमलनाथ से पहले बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की. वहीं जब बहुमत परीक्षण को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ से सवाल किया गया तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि बहुमत परीक्षण पर स्पीकर जवाब देंगे. शिवराज ने कमलनाथ के बयान पर तुरंत जवाब दिया और कहा कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में है.

रात ढाई बजे भोपाल पहुंचे बीजेपी विधायक, कांग्रेस वाले बेंगलुरु में

इस बीच बीजेपी विधायक देर रात 2.30 बजे भोपाल पहुंचे, सभी विधायकों ने एक सुर में कहा कि कमलनाथ सरकार का जाना तय है. हालांकि कांग्रेस के बागी विधायक अभी तक बेंगलुरु में ही हैं. बागी विधायकों ने भोपाल पहुंचने के लिए सुरक्षा की मांग की है. 22 बागियों में से सिर्फ 6 के इस्तीफे मंजूर किए गए हैं यानी बाकी 16 से कमलनाथ को उम्मीद है. रविवार को कैबिनेट की बैठक से निकलते वक्त मुख्यमंत्री ने ऑल इज वेल का दावा भी किया.

कांग्रेस को कोरोना टेस्ट का सहारा!

जयपुर से आए कांग्रेस के विधायकों का कोरोना टेस्ट कराया गया. बताया गया था कि कांग्रेस के दो विधायकों में कोरोना जैसे लक्षण दिखे जिसके बाद विधायकों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई. इसी के बाद से कांग्रेस सभी विधायकों का कोरोना टेस्ट कराने की मांग कर रही है. जानकारी के मुताबिक कांग्रेस की योजना है कि इस बहाने बागी होकर बीजेपी के खेमे में पहुंचे विधायकों से संपर्क साधा जा सकेगा.

अदालत का रुख कर सकती है बीजेपी

फ्लोर टेस्ट पर जारी सस्पेंस के बीच केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और नरेन्द्र सिंह तोमर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से मिले. बताया जा रहा है कि अगर स्पीकर बहुमत परीक्षण नहीं करवाते हैं तो बीजेपी अदालत का रुख कर सकती है. वहीं कांग्रेस और बीजेपी ने व्हीप जारी कर विधायकों को सदन में रहने को कहा है.

कमलनाथ सरकार कैसे बचा सकते हैं सरकार?

एमपी के सियासी उठापटक के बीच अब दो स्थितियां बन गई है. मध्य प्रदेश विधान सभा में कुल सीटें हैं 230, दो विधायकों के निधन की वजह से ये संख्या घटकर 228 रह गई है. कांग्रेस के 6 बागी विधायकों का इस्तीफा मंजूर हो चुका है. इसलिए सदन रह गया 222 सदस्यों का. इस लिहाज से बहुमत साबित करने के लिए 112 विधायकों के समर्थन की जरूरत है.

6 विधायकों को इस्तीफा मंजूर होने के बाद अभी कांग्रेस को पास 108 विधायक हैं यानि बहुमत से चार कम और बीजेपी के पास 107 विधायक हैं यानि बहुमत से 5 कम. ऐसे में किंग मेकर होंगे गैर बीजेपी गैर कांग्रेस विधायक.

जिसमें दो बहुजन समाजवादी पार्टी, एक समाजवादी पार्टी और चार निर्दलीय हैं. अगर कमलनाथ सरकार बेंगलुरु में रुके 16 विधायकों का समर्थन हासिल कर लेती है तो निर्दलीय और एसपी, बीएसपी विधायकों के समर्थन के बाद सरकार बच सकती है.

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