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संविधान से इंडिया शब्द हटाकर सिर्फ भारत रखने याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

संविधान से इंडिया शब्द हटाकर सिर्फ भारत रखने याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

लखनऊ I संविधान के पहले अनुच्छेद में ही लिखा है कि इंडिया यानी भारत. अब ऐसे में सवाल उठता है कि जब देश एक है तो नाम एक क्यों नहीं. ये मामला एक याचिका के रूप में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जिस पर आज सुनवाई होगी. याचिकाकर्ता की दलील है कि इंडिया शब्द गुलामी की निशानी है और इसीलिए उसकी जगह भारत या हिंदुस्तान का इस्तेमाल होना चाहिए.

याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन कर इंडिया शब्द हटा दिया जाए. अभी अनुच्छेद 1 कहता है कि भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा. इसकी जगह संशोधन करके इंडिया शब्द हटा दिया जाए और भारत या हिन्दुस्तान कर दिया जाए. देश को मूल और प्रमाणिक नाम भारत से ही मान्यता दी जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि अंग्रेजी नाम का हटना भले ही प्रतीकात्मक होगा, लेकिन यह हमारी राष्ट्रीयता, खास तौर से भावी पीढ़ी में गर्व का बोध भरने वाला होगा. दरअसल, इंडिया शब्द की जगह भारत किया जाना हमारे पूर्वजों द्वारा स्वतंत्रता संघर्ष में की गई कठिन भागीदारी को न्यायसंगत ठहराएगा.

उमा भारती ने भी उठाए सवाल

इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता उमा भारती ने दो दिन पहले एक के बाद एक सात ट्वीट किए. उमा भारती ने कहा, ‘एक देश या एक व्यक्ति के दो नाम नहीं होते जैसे कि सूर्य प्रकाश that is सनलाइट, ऐसा किसी का नाम नहीं होगा. इसी तरह से इंडिया that is भारत किसी का नाम होना हास्यास्पद है.’

आगे उमा भारती ने कहा, ‘शायद भारत माता नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री होने की प्रतीक्षा में थी कि उसके माथे पर जो इडिया शब्द का दाग लगा है, उसको अब हम पोंछ दें.’

कैसे मिला नाम

कहते हैं कि महाराज भरत ने भारत का संपूर्ण विस्तार किया था और उनके नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा. मध्य युग में तब तुर्क और ईरानी यहां आए तो उन्होंने सिंधु घाटी से प्रवेश किया. वो स का उच्चारण ह करते थे और इस सिंधु का अपभ्रंश हिंदू हो गया. हिंदुओं के देश को हिंदुस्तान का नाम मिला.

जब अंग्रेज आए तो उन्होंने इंडस वैसी यानी सिंधु घाटी के आधार पर इस देश का नाम इंडिया कर दिया क्योंकि भारत या हिंदुस्तान कहना उनके लिए असुविधाजनक था.

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