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सोने की कीमतों मे आ सकता है भारी उछाल, 68000 रुपये तक पहुंच सकती है 10 ग्राम सोने की कीमत

सोने की कीमतों मे आ सकता है भारी उछाल, 68000 रुपये तक पहुंच सकती है 10 ग्राम सोने की कीमत

नई दिल्ली। कोरोना महामारी और लॉकडाउन को लेकर दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में है। शेयर बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को तरजीह दे रहे हैं। इससे सोने के रेट में अभूतपूर्व तेजी देखी जा रही है। पिछले दिनों सोने की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। बाजार के जानकारों के मुतबिक सोने की कीमतों में तेजी जारी रहेगी और अगले दो साल में इसकी कीमत 68000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।

इकोनामिक्स टाइम्स की एक खबर के मुताबिक मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में एसोसिएट डायरेक्टर और कमोडिटीजी और करेंसीज हेड किशोर नार्ने का कहना है कि अगले एक से डेढ़ साल में सोने का भाव 65000 से 68000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोने का भाव काफी हद तक डॉलर और रुपया की विनिमय दर पर भी निर्भर करेगा। वहीं एंजेल ब्रोकिंग के डीवीपी (कमोडिटीज एंड करेंसीज रिसर्च) अनुज गुप्ता ने कहा, “सोने में रुख पॉजिटिव बना हुआ है। भू-राजनीतिक तनाव और आईएमएफ के वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ निगेटिव रहने के अनुमान से सोने में तेजी जारी रहेगी।”

सोना 50,0000 से 51,000 पर होगा अगले एक से दो महीने में!

बता दें बुधवार को एमसीएक्स पर सोने का अगस्त वायदा 48,589 रुपये प्रति 10 ग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। वहीं सर्राफा बाजार में भी सोने का हाजिर भाव ऑल टाइम हाई पर था। अनुज गप्ता की मानें तो अगले एक से दो महीने में सोना 50,0000 से 51,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका भाव 1772 डॉलर प्रति औंस के करीब है। इससे पहले अक्टूबर 2012 में सोने का भाव 1779 डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। आने वाले दिनों में सोने के रेट में तेजी जारी रहने की कई वजहे हैं। गुप्ता बताते हैं, “डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी से भी सोने को सपोर्ट मिल रहा है। माहौल सोने की कीमतों में तेजी के लिए अनुकूल है।”

लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर

दूसरा सबसे बड़ा कारण है आर्थिक मंदी। आईएमएफ ने बड़ी मंदी का अनुमान व्यक्त किया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में रिकवरी दो महीने पहले के उसके अनुमान के मुकाबले सुस्त रहेगी। आईएमएफ ने इस साल वैश्विक उत्पादन में 4.9 फीसद और उभरते बाजारों के उत्पादन में 3 फीसदी की कमी आने का अनुमान व्यक्त किया है। वहीं उसने भारत की जीडीपी में भी 4.5 फीसद की कमी आने का अनुमान व्यक्त किया है। आईएमएफ का मानना है कि महामारी और लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने वाला है।

कोरोना ढा रहा कहर

तीसरा बड़ा कारण है दुनिया में कोरोना का तेजी से बढ़ता संक्रमण। इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या अब दुनिया में 9.77 लाख हो गई है। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के डैशबोर्ड के मुताबिक कोरोना संक्रमितों की संख्या 95 लाख 69 हज़ार तक पहुंच चुकी है। ब्राजील और भारत में अब भी संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं अमेरिका, चीन सहित कुछ देशों में संक्रमण का दूसरा चरण दिख रहा है। भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव की वजह से निवेशक सुरक्षित माध्यम में पैसा लगा रहे हैं।

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