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देश को मिली नयी शिक्षा नीति, फीस की अधिकतम सीमा भी तय के साथ साथ जाने और क्या है खास

देश को मिली नयी शिक्षा नीति, फीस की अधिकतम सीमा भी तय के साथ साथ जाने और क्या है खास

नई दिल्ली. उद्योग जगत के शीर्ष कार्यकारियों का कहना है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी प्राप्त नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, शिक्षा को बेहतर बनाने के लिये ठोस डिजिटल संरचना तैयार होगी और जवावदेही और रोजगार प्राप्ति में सुधार होगा. आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी. इसके तहत उच्च शिक्षा संस्थानों के लिये एकल नियामक, डिग्री पाठ्यक्रमों में बीच में शामिल होने व छोड़ने का विकल्प, एमफिल को समाप्त करने आदि समेत कई सुधार किये गये हैं. इससे पहले 1986 में बनी शिक्षा नीति में आखिरी बार 1992 में संशोधन किया गया था.
GDP का 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च किया जाएगा
नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अधिकार कानून के दायरे को व्यापक बनाया गया है. अब 3 साल से 18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर लाया जाएगा. अब शिक्षा में कुल जीडीपी (GDP) का 6 फीसदी खर्च किया जाएगा. अभी तक राज्य और केंद्र को मिलाकर करीब 4 फीसदी होता है. फीस की अधिकतम सीमा तय होगी. नई नीति में शिक्षण संस्थाओं को ग्रेडेड ऑटोनॉमी दिए जाने का प्रावधान है. जितनी अच्छी ग्रेड, उतनी Autonomy दी जाएगी. उच्च शिक्षा के लिए सिर्फ एक ही रेगुलेटर होगा. डीम्ड और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए एक मानदंड होगा.
नई शिक्षा नीति ने रुचि के हिसाब से विषय का चुनाव किया जा सकेगा. अब PCB या PCM का कॉम्बिनेशन जरूरी नहीं होगा. शिक्षा में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा. पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप भी होगा. GDP का 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च किया जाएगा. फीस की अधिकतम सीमा तय होगी. शिक्षा के लिए वर्चुअल लैब विकसित की जाएगी. देश की प्रमुख 8 भाषाओं में ई-कोर्स होंगे.शिक्षा पर खर्च करीब दोगुना करने का लक्ष्य है. शिक्षा क्षेत्र में रेगुलेशन कम करने पर जोर दिया गया है. अलग-अलग रेगुलेटर की जगह सिर्फ एक रेगुलेटर होगा. शिक्षा में तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर होगा. 5वीं तक अंग्रेज़ी की पढ़ाई नहीं होगी. 5वीं तक मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई होगी. 8वीं तक अंग्रेजी की पढ़ाई नहीं करने की छूट होगी.

जानिए क्या है इंडस्ट्री की राय:

एनआईआईटी लिमिटेड के चेयरमैन एवं सह-संस्थापक तथा एनआईआईटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक राजेंद्र एस पवार ने कहा, ‘‘भारत की बहुप्रतीक्षित नई शिक्षा नीति (एनईपी), दिशात्मक परिवर्तन और क्षेत्रीय सुधारों की एक अग्रदूत है. इससे 21वीं सदी में भारत के शिक्षा क्षेत्र में नये आयामों के खुलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह प्रतिशत खर्च करने का इरादा निर्णायक बदलाव लायेगा.

टीमलीज सर्विसेज की वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीति शर्मा ने कहा कि यह भारत में सीखने को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है. यह पारिस्थितिकी तंत्र में समग्र जवाबदेही में सुधार करेगा.
अपग्रैड के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं सह-संस्थापक मयंक कुमार ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि यह ऑनलाइन शिक्षा के लिये एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जैसा कि अभी ‘शिक्षा’ और ‘ऑनलाइन शिक्षा’ समानार्थी हो गये हैं.
स्किल मॉन्क्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रामेश्वर मंडली ने कहा कि नई नीति वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनने के भारत के दृष्टिकोण को एक गति प्रदान करेगी.

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