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राजस्थान: गहलोत गुट विधानसभा सत्र की रणनीति बनाने मे जुटा, पायलट गुट को न्योता नहीं

राजस्थान: गहलोत गुट विधानसभा सत्र की रणनीति बनाने मे जुटा, पायलट गुट को न्योता नहीं

जयपुर I दावे किए जा रहे हैं कि राजस्थान का सियासी दंगल खत्म हो गया है, लेकिन क्या वाकई सब कुछ ठीक है? अगर सब कुछ ठीक होता तो पायलट गुट और गहलोत गुट एक साथ होते, लेकिन अब भी दूरियां हैं. इस बीच कल से शुरु हो रहे विधानसभा सत्र को लेकर तैयारियां शुरु हो गई हैं.

गहलोत गुट के विधायक, जो अब तक जैसलमेर के होटल में तनाव भरी जिंदगी जी रहे थे. तनाव इस बात का कि सरकार बचेगी या गिरेगी, लेकिन अब देखिए सबके चेहरे कैसे खिल हुए हैं. पायलट की वापसी इनके लिए रौनक लेकर आइए. जयपुर लौटने से पहले इन्होंने जैसलमेर में तफरीह की. बाजारों में घूमे और शॉपिंग भी की. फिर मंदिर में पूजा अर्चना भी की.

सुकून के साथ कुछ वक्त बिताने के बात गहलोत गुट के सारे विधायक जयपुर के फेयरमोंट होटल लौट आए. इस बीच पायलट भी अपने समर्थक विधायकों के साथ मंगलवार शाम से ही जयपुर में मौजूद हैं, लेकिन दिलचस्य ये कि दोनों गुटों के दिल अभी तक नहीं मिले हैं.

आज कांग्रेस विधायक कल से शुरु हो रहे विधानसभा सत्र की रणनीति को लेकर माथापच्ची करेंगे, लेकिन खबरों के मुताबिक मीटिंग के लिए ना तो पायलट को और ना ही उनके किसी समर्थक विधायक को न्योता दिया गया है. दरअसल, खुद को राजनीति का जादूगर मानने वाले गहलोत अब हाईकमान को अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भले ही दावा कर रहे हों कि सबको सम्मान देंगे जो हुआ वो इतिहास है, लेकिन उनके समर्थक विधायक अब भी पायलट पर निशाना साध रहे हैं. इस बीच खबर ये भी है कि गहलोत गुट के विधायकों ने राजस्थान के प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल के सामने पायलट गुट के साथ सुलह पर सवाल खड़े करने का मन भी बनाया है.

इसकी एक झलक मंगलवार की शाम जैसलमेर के होटल मे तब दिखी थी जब विधायकों ने गहलोत के सामने ढेरों सवाल रख दिए थे. मंत्री प्रताप सिंह खचरियावास ने कहा कि जहां तक सचिन पायलट के वापस प्रदेश अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री बनाने की बात हैं, यह सब आलाकमान को तय करना हैं. यह मेरे हाथ में नही है.

मंत्री प्रताप सिंह खचरियावास ने कहा कि अभी तक ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने इस संबंध में कोई स्टेटमेंट नही दिया हैं, लेकिन यह तय हैं कि हम सब मिलकर काम करेंगे. सचिन पायलट जी का सम्मान हर समय बना रहेगा. अब हमारे साथी भी वापस आ गए हैं, बात सारी खत्म हो गई हैं. आलाकमान जो फैसला करेगा, वह हम सबको मान्य होगा.

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