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राजनैतिक

सोनिया दोबारा अध्यक्ष बनीं, राहुल गांधी का नियंत्रण पार्टी पर बना रहा, ये है काँग्रेस मे असंतोष का कारण: दिग्विजय

सोनिया दोबारा अध्यक्ष बनीं, राहुल गांधी का नियंत्रण पार्टी पर बना रहा, ये है काँग्रेस मे असंतोष का कारण: दिग्विजय

नई दिल्ली I अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस में हलचल जारी है. पार्टी नेता दिग्विजय सिंह के एक बयान ने इसमें और तेजी ला दी है. दिग्विजय सिंह ने कहा है कि पार्टी के अंदर असंतोष एक दिन में नहीं फैला. यह विवाद उसी दिन तेज हो गया था जिस दिन सोनिया गांधी पिछले साल पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनाई गई थीं. राहुल गांधी ने अध्यक्ष का पद छोड़ तो दिया लेकिन पार्टी पर उनका नियंत्रण बना रहा. इसका सबूत पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति से मिलता है.

ऐसा लगता है कि पार्टी के नेताओं में असंतोष का एक कारण यही बना कि राहुल गांधी भले ही अध्यक्ष नहीं रहे लेकिन पर्दे के पीछे वे पार्टी पर नियंत्रण जारी रखे हुए थे. पार्टी में बागी नेताओं की संख्या राज्यसभा चुनाव के बाद और बढ़ गया. मुकुल बनानी या केसी वेणुगोपाल की जगह राजीव सातव के नामांकन के लिए राहुल गांधी ने हामी भरी. इस फैसले के बाद पार्टी में विरोध बढ़ गया.

बागी नेताओं के एक सूत्र ने कहा कि पार्टी के 25 सांसद पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले थे. कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जारी पत्र पर पूरे देश के लगभग 100 नेता दस्तखत करने वाले थे लेकिन आधे से ज्यादा इसमें पीछे हट गए क्योंकि उन्हें कार्रवाई का डर था. एक नेता ने बताया, लोकसभा और राज्यसभा से 12-12 नेता पत्र के समर्थन में थे. इन नेताओं ने कहा कि वे जो कर रहे हैं वह सही है लेकिन वे पीछे इसलिए हट गए क्योंकि उन्हें अपने खिलाफ कार्रवाई का डर था. उन्हें डर था कि पार्टी से निकाल दिया जाएगा.

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले एक नेता ने बताया कि चिट्ठी में गांधी और नेहरू परिवार के योगदान की तारीफ की गई है, खासकर सोनिया गांधी के कार्यों की सराहना है. इसके बावजूद पत्र पर दस्तखत करने वाले नेताओं को बागी माना जा रहा है. अनुमान लगाया जा रहा है कि पार्टी के कई बड़े नेता इसमें शामिल हों लेकिन उन्होंने दस्तखत नहीं किए और चुप्पी साध ली. कई प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्रियों ने बागी नेताओं के इस रुख को गलत बताया. एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि सीडब्ल्यूसी के बाद मुख्यमंत्रियों और प्रदेश अध्यक्षों ने फोन किया और माफी मांगी. उन्होंने बताया कि ऐसा करने के लिए कहा गया था. हमें इस बात के लिए खेद है लेकिन पत्र दिल्ली से भेजा गया था.

इस पत्र से पार्टी की छवि पर क्या असर पड़ेगा? इसके जवाब में पटेल ने कहा, मामला नेताओं और उनके अध्यक्ष के बीच का है. हमलोग एक लोकतांत्रिक पार्टी हैं और पार्टी के अंदर लोकतंत्र है. नेताओं में असंतोष हो सकता है लेकिन इसे पार्टी के मंच पर उठाना चाहिए था. सोनिया गांधी के कार्यकाल के बीच राहुल गांधी पर आरोप लगा हैं कि वे पार्टी का संचालन कर रहे हैं. लेकिन वे फैसले लेने की बात नकारते रहे हैं और कहते रहे हैं कि वे सिर्फ सांसद हैं.

राजस्थान के पार्टी प्रभारी अजय माकन राहुल गांधी की पसंद बताए जाते हैं. पूर्व में भी कुछ नियुक्तियां हुईं जिसके लिए राहुल गांधी जिम्मेदार बताए जाते हैं. यूपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी जैसे नेता राहुल गांधी की पसंद हैं. कर्नाटक के पार्टी अध्यक्ष डीके शिवकुमार और सीएलपी नेता भूपिंदर हुड्डा की इसलिए हुई क्योंकि दूसरा कोई विकल्प नहीं था.

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