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सोनिया के साथ अन्य राज्यो के मुख्यमंत्रियों की मीटिंग संसद में मोदी सरकार के लिए बढ़ा सकती है परेशानी

नई दिल्ली I कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. यह बैठक तो जीएसटी और नीट-जेईई परीक्षा के मुद्दे पर थी, लेकिन विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों ने इन मुद्दों के साथ-साथ मोदी सरकार को जिस तरह से अपने तेवर दिखाएं हैं, उसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. तीन सप्ताह के बाद मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है और विपक्षी दल तमाम मुद्दों पर ऐसे ही एक साथ खड़े रहे तो संसद में मोदी सरकार के लिए सिरदर्द बढ़ सकता है.

सोनिया गांधी के साथ हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने देश के संघीय ढांचे की रक्षा के लिए गैर एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सामूहिक लड़ाई लड़ने का आह्वान किया है. वहीं, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमें फैसला करना चाहिए कि हमें केंद्र सरकार से डरना है या लड़ना है. कांग्रेस के साथ मंच शेयर करने से अक्सर परहेज करने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तेवर भी नरम दिखाई दिए. ममता बनर्जी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बहाने मोदी सरकार पर निशाना साधा.

बता दें कि संसद का मॉनसून सत्र 14 सितंबर से शुरू होने की संभावना है. कोरोना महामारी के बीच होने जा रहा यह सत्र काफी हंगामेदार होने की संभावना है. कोरोना संक्रमण, देश की आर्थिक स्थिति, लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार को विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ सकता है.

मोदी सरकार ने इस साल मार्च में 10 अध्यादेश पारित किए थे, जिन्हें विचार के लिए संसद में ला सकती है. आपको बता दें कि अध्यादेश छह महीने के बाद समाप्त हो जाते हैं और उन्हें एक बिल के रूप में पास करना अनिवार्य होता है. संसद में जिन अध्यादेशों को लिया जाएगा, उनमें महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश- 2020, वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश 2020, किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश 2020 भी शामिल हैं. साथ ही सांसदों के वेतन से संबिधत अध्यादेश भी सदन के पटल पर लाए जा सकते हैं.

डेटा प्रोटेक्शन बिल और लेबर कोड सहित अन्य विधायी मुद्दे भी हैं, जिसे सत्र के दौरान विचार के लिए लाए जाने की संभावना है. दिसंबर 2019 में शीतकालीन सत्र में पेश किया गया डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019, डेटा संग्रहण और साझा करने के नियमों से संबंधित है, जो कि नागरिकों के लिए उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर परिभाषित करता है. वर्तमान में एक संयुक्त संसदीय समिति द्वारा इसकी जांच की जा रही है.

वहीं, मोदी सरकार की ओर से जारी किए गए अध्यादेशों पर विचार के लिए कांग्रेस ने एक कमेटी का गठन भी किया है. सोनिया गांधी ने इस कमेटी में जिन नेताओं को रखा है, उनमें पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश, डॉ अमर सिंह और गौरव गोगोई शामिल हैं. इस समिति के संयोजन की जिम्मेदारी जयराम रमेश को सौंपी गई है. यह कमेटी केंद्र की ओर से जारी प्रमुख अध्यादेशों पर चर्चा और पार्टी का रुख तय करने का काम करेगी. एक तरह से सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने बकायदा रणनीति बनाने की कवायद शुरू कर दी है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोनिया की बैठक में कहा कि हमें फैसला करना चाहिए कि हमें केंद्र सरकार से डरना है या लड़ना है. ठाकरे ने कहा कि गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को जोरदार तरीके से अपनी आवाज उठानी चाहिए, क्योंकि केंद्र सरकार हमारी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है. उद्धव ठाकरे ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहा कि दीदी हम साथ रहेंगे तो हर आपत्ति डरेगी.

सीएम उद्धव ठाकरे और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पहली बार इस तरह से किसी बैठक में आमने-सामने नजर आ रहे हैं. मीटिंग के दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार का क्या मतलब है, हम सिर्फ पत्र लिखते रहते हैं. क्या एक ही व्यक्ति बोलता रहे और हम सिर्फ हां में हां मिलाते रहें. उद्धव का यह बयान काफी महत्व रखता है.

विपक्ष, मुख्य रूप से कांग्रेस लगातार कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण पटरी से उतरी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर हमलावर है. साथ ही कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष की घटना की जानकारी देने के बारे में पारदर्शी तरीका नहीं अपनाया गया. ऐसे में इन मुद्दों को विपक्ष सदन में उठा सकता है.

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