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भारत के कड़े रुख से बैकफुट पर चीन, पीछे हटने का बढ़ा दबाव

भारत के कड़े रुख से बैकफुट पर चीन, पीछे हटने का बढ़ा दबाव

नई दिल्ली. वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर भारत के सख्त और आक्रामक रुख अपनाने से चीन पर पीछे हटने का दबाव बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी चीन के रक्षा मंत्री को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि भारत चीन की नाजायज शर्त को नहीं मानेगा और उसे हर हाल में मई से पूर्व की यथास्थिति बहाल करनी होगी।

रक्षा क्षेत्रों के विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में चीन के पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। चीन में इस समय पूरी दुनिया के खिलाफ माहौल बना हुआ है। यदि एलएसी पर हालात ज्यादा बिगड़ते हैं तो इसकी जिम्मेदारी भी स्वत चीन पर ही आ जाएगी। चीन को मुहतोड़ जवाब देने के लिए भारत तो तैयार ही है, विश्व समुदाय भी उसकी घेराबंदी के लिए तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि इस समय वैश्विक माहौल उसके पक्ष में नहीं। भारत ही नहीं, ताइवान जैसे अन्य पड़ोसी भी अब उस पर हावी होने लगे हैं। दूसरे, भारत का दबाव में लेने की जो कोशिश उसने की थी वह विफल हो गई है। क्योंकि भारत की सेना से लेकर विदेश मंत्रालय और राजनीतिक नेतृत्व तक आक्रामक रुख अख्तियार किया हुआ है।

पेंगोंग झील को लेकर इलाके में जहां सबसे ज्यादा टकराव की स्थिति बनी हुई है, वहां भारतीय सेनाएं अहम स्थानों पर मोर्चा संभाल चुकी हैं। सेना के सूत्रों का मोटे तौर पर मानना है कि यदि आने वाले समय में चीनी सेनाएं पीछे नहीं हटती हैं तो सेना उनसे कब्जे वाले स्थानों को खाली कराने की कार्रवाई भी कर सकती है। इसकी प्रतिक्रिया के लिए भारतीय सेनाएं पूरी तरह से तैयार हैं। चीन को भी यह संदेश दिया जा चुका है।

इस बीच सेना के सूत्रों के अनुसार अभी पेंगोंगे इलाके में स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। लेकिन अगले सप्ताह सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता फिर से शुरू होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इलाके में भीषण सर्दियां शुरू होने तक बातचीत के विकल्पों को खुले रखे जाने की संभावना है। तब तक चीन के पास स्वत: पीछे हटने का विकल्प भी खुला है।

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