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1 अक्टूबर से बच्चों पर गलत प्रभाव डालने वाले विज्ञापन होंगे बंद! केंद्र ने जारी की गाइडलाइन्स

नई दिल्ली. बच्चों को टारगेट करने वाले विज्ञापनों पर सरकार शिकंजा कसने जा रही है. कंज्यूमर अफेयर मंत्रालय ने बच्चों को भ्रमित करने वाले विज्ञापनों पर ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी कर 18 सितंबर तक सभी की राय मांगी है. 1 अक्टूबर 2020 से यह गाइडलाइंस लागू हो सकती है. आपको बता दें कि विज्ञापनों के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइन को सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने बनाया है. इस अथॉरिटी की स्थापना कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत हुई थी.

बच्चों को निशाना बनाने वाले विज्ञापनों पर होगी कार्रवाई- कंपनियां बच्चों को टारगेट करते अब विज्ञापन नहीं बना पाएंगी. बच्चों को खतरनाक स्टंट करता हुआ नहीं दिखाया जा सकता है. कंजूमर मंत्रालय ने ड्राफ्ट जारी किया है. 18 सितंबर तक सब की राय मांगी है. गलत जानकारी देने वाले विज्ञापनों पर शिकंजा कसेगा. अगर बच्चे वह उत्पाद नहीं खरीदेंगे तो उनका मजाक नहीं उड़ाया जा सकता है. बच्चों को शराब और तंबाकू के विज्ञापनों में नहीं दिखाया जा सकता है.उत्पाद के तत्वों को बढ़ा चढ़ाकर के नहीं दिखाएंगे.बच्चों को लेकर कोई चैरिटेबल अपील नहीं कर सकेंगे. सेलिब्रिटी उत्पाद का समर्थन करने से जानकारी उसकी जानकारी होनी चाहिए. नहीं पढ़े जाने वाला विज्ञापन गुमराह करने वाले विज्ञापन माना जाएगा.

गाइडलाइन की मुख्य बातें- विज्ञापन में डिस्क्लेमर सामान्य आईसाइट वाले व्यक्ति को एक ठीक दूरी और एक ठीक स्पीड से पढ़ने पर साफ दिखना चाहिए.डिस्क्लेमर विज्ञापन में किए गए दावे की ‘भाषा में’ ही होना चाहिए और फॉन्ट भी दावे वाला ही इस्तेमाल हो.

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