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लड़ाकू विमान राफेल आज भारतीय एयरफ़ोर्स में होगा शामिल, बढ़ेगी भारत की ताकत

अंबाला : पूर्वी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ तनातनी के बीच पांच राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप को आज औपचारिक रूप से वायुसेना में शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली, चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया और रक्षा सचिव अजय कुमार भी मौजूद रहेंगे। चीन से तनाव के बीच इसे काफी अहम माना जा रहा है। समझा जाता है कि इससे आसमान में भारत की ताकत कई गुना बढ़ेगी। यहां जानें राफेल से जुड़ी 5 खास बातें:

भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमानों के लिए चार साल पहले करार हुआ था, जिनमें से 5 विमानों की पहली खेप 29 जुलाई को भारत पहुंची थी। इन पांच राफेल विमानों ने 27 जुलाई को ही फ्रांस के मेरिगनेक एयरबेस से उड़ान भरी थी, जिसके बाद यूएई के अल धफरा एयरबेस पर कुछ समय के ब्रेक के बाद से दो दिन बाद भारत पहुंचे। इस दौरान उन्‍होंने लगभग 8500 किलोमीटर की दूरी तय की।

भारत-फ्रांस के बीच लगभग 59,000 करोड़ रुपये की लागत से जिन 36 राफेल विमानों के लिए करार हुआ था, उनमें से 30 लड़ाकू विमान होंगे, जबकि छह प्रशिक्षु विमान होंगे। ट्रेनर जेट में दो सीटें होंगी और इसमें भी तकरीबन वे सभी सुविधाएं होंगी, जो फाइटर जेट में होती हैं। राफेल विमानों की पहली खेप हरियाणा में अंबाला एयर बेस पर उतरी, जबकि दूसरी खेप को पश्चिम बंगाल के हसीमारा में उतारा जाएगा।

राफेल विमानों को आकाश में भारतीय वायुसेना की बड़ी ताकत के तौर पर देखा जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि भारतीय वायुसेना के लिए यह विमान ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। इसे पाकिस्‍तान व चीन की वायुसेना के पास मौजूद अब तक के सभी उन्‍नत लड़ाकू विमानों से भी बेहतर बताया जा रहा है। जब भारत में ये विमान पहुंचे तो इसके बारे में पाकिस्‍तान में खूब सर्च किया गया, जिसका पता गूगल ट्रेंड्स से चलता है।

दसॉल्ट एविएशन निर्मित राफेल को अब तक का सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान बताया जा रहा है, जिसके आगे चीन और पाकिस्‍तान के कोई भी लड़ाकू विमान नहीं ठहरते। इसे चीन की वायुसेना के पास मौजूद चेंग्दू J-20 और पाकिस्तानी वायुसेना के F-16 व JF-17 जेट से भी तेज व सटीक मारक क्षमता वाला बताया जा रहा है। यही वजह है कि इसे लेकर पाकिस्‍तान और चीन के खेमे में भी हलचल देखी जा रही है।

रक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि राफेल अपने वजन से 1.5 गुना अधिक वजन उठा सकता है, जिसका अर्थ यह हुआ कि वह जे-20 के मुकाबले ज्यादा हथियार व ईंधन अपने साथ ले जा सकता है। राफेल विमान अफगानिस्तान, लीबिया और सीरिया में अपना युद्ध कौशल दिखा चुके हैं। अब भारतीय वायुसेना में इसके शामिल होने को मील का पत्‍थर बताया जात रहा है। इस दौरान राफेल व तेजस विमान हवाई करतब भी दिखाएंगे।

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