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एलएसी पर यथास्थिति बरकरार, भारत-चीन के बीच जल्‍द हो सकती है कोर कमांडर स्‍तर की वार्ता

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तनाव कम करने को लेकर भारत और चीन के बीच जल्‍द कोर कमांडर स्‍तर की बातचीत हो सकती है। इस बैठक में भारतीय पक्ष की ओर से कौन से मुद्दे उठाए जाएंगे इसको लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में बातचीत के एजेंडे को अंतिम रूप दिया गया। इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत आला अधिकारी शामिल हुए। शीर्ष आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आगामी वार्ता में भारत चीनी सैनिकों की वापसी को लेकर दबाव बनाएगा।
पिछले गुरुवार को मास्को में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की बहुप्रतीक्षित मुलाकात के बाद जारी संयुक्त घोषणा में कहा गया था कि पूर्वी लद्दाख के तनाव वाले इलाकों से दोनों देशों के सैनिकों की जल्द वापसी के लिए सैन्य व कूटनीतिक वार्ता जारी रखी जाए। एक हफ्ता बीत जाने के बावजूद दोनों देशों के बीच कोई सैन्य वार्ता नहीं हुई है। उधर, पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। गलवन घाटी, पैंगोग झील समेत कुछ दूसरे इलाकों में दोनों तरफ से एक दूसरे की सेनाओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

साथ ही दोनों तरफ से सर्दियों को देखते हुए बड़े पैमाने पर साजो समान जुटाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर नई दिल्ली में चीन के साथ संबंधों की गहन समीक्षा का दौर जारी है। शुक्रवार को केंद्र सरकार की तरफ से गठित चाइना स्टडी ग्रुप की बैठक तकरीबन डेढ़ घंटे चली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शामिल होने के लिए बीजिंग में भारत के राजदूत विक्रम मिस्त्री भी आए थे, फिर वह लौट गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत सेना से जुड़े लगभग सभी बड़े अधिकारी इसमें शामिल हुए।

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