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दस महीनो के टकराव के बाद इंडिया- चाइना आर्मी पीछे हटने को हुई तैयार

नई दिल्ली. चीनी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर तैनात भारत और चीन के फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात सैनिकों ने बुधवार से व्यवस्थित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया. हालांकि अब तक भारतीय पक्ष की ओर से इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं आई है. चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वु कियान ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों पर तैनात भारत और चीन के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों ने बुधवार से व्यवस्थित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया.

कियान ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भारत और चीन के बीच कमांडर स्तर की नौवें दौर की वार्ता में बनी सहमति के मुताहित दोनों देशों के सशस्त्र बलों की अग्रिम पंक्ति की इकाइयों ने 10 फरवरी से पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से व्यवस्थित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया. उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में पिछले साल मई से सैन्य गतिरोध चला आ रहा है.

वहीं 24 जनवरी को दो सेनाओं के सैन्य कमांडरों द्वारा जल्द से जल्द सेनाओं को पीछे करने पर जोर देने के लिए सहमत होने के बाद पैंगोग के दक्षिणी तट पर टैंकों और पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों की वापसी ने 10 महीने के सैन्य गतिरोध के हल की उम्मीद जगाई है.

बीते आठ महीनों में तनाव कम करने के लिए वार्ता में यह पहला महत्वपूर्ण कदम है. जुलाई 2020 की शुरुआत में गलवान घाटी में डिसएंगेजमेंट हुआ लेकिन यह अन्य क्षेत्रों में नहीं हो पाया. सीमा रेखा की निगरानी करने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रक्रिया के साथ ही भारत क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखेगा.

भारतीय सैनिकों की गश्त में दिक्कतें
पूर्वी लद्दाख थिएटर में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की आक्रामक फॉरवर्ड पोस्टिंग ने पैंगोग, गोगरा और कोंगका ला के उत्तरी तट पर देपसांग, फिंगर एरिया सहित कई क्षेत्रों में भारतीय सेना के गश्त में दिक्कत पैदा की है.

पूर्व उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा (सेवानिवृत्त) ने कहा ‘ डिसएंगेजमेंट सकारात्मक कदम है. मुझे लगता है कि हमें इस प्रक्रिया की और जानकारी का इंतजार करना होगा. उम्मीद है कि यह लद्दाख में सभी क्षेत्रों को कवर करने वाले व्यापक समझौते का एक हिस्सा है.’

देपसांग के फॉरवर्ड पोस्ट्स में पीएलए की तैनाती ने भारतीय सैनिकों की पहुंच को सीमित कर दिया है. इसमें पैट्रोलिंग पॉइंट्स (पीपी) 10, 11, 11-ए, 12 और 13. शामिल हैं. इससे पहले कि पीएलए ने फिंगर 4, भारतीय सेना के पोस्ट्स को भी हथिया लिया है. भारतीय सेना फिंगर 8 तक गश्त कर सकती है जिसे नई दिल्ली भारतीय क्षेत्र के भीतर मानता है. इस क्षेत्र में भारतीय दावा फिंगर 8 तक फैला हुआ है, जबकि चीनी दावा फिंगर 4 तक है. दोनों लगभग 8 किमी दूर हैं.

जल्द हो सकती है 10वें दौर की वार्ता
एक रिपोर्ट के अनुसार नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर एक भारतीय अधिकारी ने बताया ‘दोनों के बीच सैन्य वार्ता का 10 वां दौर जल्द ही हो सकता है. डिसएंगजमेंट के बाद उसका वेरिफिकेशन एक अहम प्रक्रिया है, जो सेक्टरों में बांटकर चरणबद्ध तरीके से होगा.’ कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, और भारत को डिसएंगेजमेंट प्रॉसेस के दौरान बेहद सतर्क रहना चाहिए.

पूर्व उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ‘ चीनी भ्रम पैदा करने में उस्ताद हैं. पैंगोग की दक्षिणी ऊंचाइयों से उनकी वापसी एक निर्णायक कदम हो सकती है. उन्हें ऐसी दूरी पर वापस जाना होगा जहां से तुरंत वापसी संभव ना हो. डिसएंगेजमेंट में सैनिकों का जरूरी दूरी तक महत्वपूर्ण है.

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