Select your Language: हिन्दी
Auto

अगर आपकी इंश्याेरेंस कंपनी गाडी का क्लेम देने से मना कर रही है ताे ये तरीका अपनाएं

नई दिल्ली. कार खरीदने के बाद किसी कारणवश उसका एक्सीडेंट हाे जाए और क्लेम के समय आपकाे पता चले कि इंश्याेरेंस कंपनी भुगतान करने से मुकर रही है ताे उस वक्त पैराें से जमीन खिसकना लाजमी है. ऐसी स्थिति में दाे-चार हजार रुपये खर्च करने की बात नहीं हाेती है. ऐसा ही हुआ था हैदराबाद में बंजारा हिल्स में रहने वाले सुधाकर राजू के साथ भी. उन्‍होंने दिसंबर 2012 में Audi Q7 60 लाख रुपये की खरीदी थी. इसके लिए उन्हाेंने 1.12 लाख का एक निजी कंपनी से इंश्याेरेंस करवाया था.

15 सिंतबर 2013 काे वे कही जा रहे थे जहां काफी पानी भरा था. वे भी अन्य लाेगाें की तरह रूक गए और पानी उतरने का इंतजार करने लगे. लेकिन बारिश और तेज हाे गई और पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि उनकी कार के इंजन में भी पानी भर गया. उन्हाेंने काफी काेशिश की लेकिन कार शुरू नहीं हुई. आखिरकार उन्हें गाड़ी काे टाे करवाकर शो -रूम ले जाना पड़ा.

जहां इंश्याेरेंस कंपनी का एक बंदा कार काे हुए नुकसान का इंस्पेक्शन करने आया. उसने सुधाकर काे बताया कि पानी से हुए डैमेज का क्लेम कंपनी नहीं मानेगी. यहां तक की कंपनी काे भेजी अपनी रिपाेर्ट में उसने यह तक लिख दिया कि इसमें गलती सुधाकर की थी क्याेंकि इंजन में पानी चले जाने के बाद हाइड्राे लॉक हाेने पर भी सुधाकर गाड़ी काे स्टार्ट करने की काेशिश करते रहे जिसकी वजह से इंजन डैमेज हाे गया है. इसलिए इसमें सुधाकर गलती है ना किसी और की.

इसी रिपाेर्ट पर कंपनी ने यह सबकुछ आपकी लापरवाही से हुआ है. कंपनी ने 53 हजार रुपये देनी की बात ही कही वाे भी दूसरे नुकसान पर. सुधाकर कंपनी के तर्क से सहमत नहीं थे. उन्हाेंने 20 लाख रुपए देकर अपनी कार ताे ठीक करवाई लेकिन तेलगाना स्टेट कंज्यूमर डिस्पूट रिडरेशनल कमीशन में जाकर केस भी कर दिया.

केस लगभग सात साल तक चलता रहा. आखिरकार फैसला सुधाकर के पक्ष में आया और एमएसके जायसवाल, मीना रामानथन की बैंच ने इंश्यारेंस कंपनी काे नुकसान की भरपाई यह कहते हुए करने काे कही कि जब काेई भी व्यक्ति ऐसी स्थिति में फंसा हाे ताे वहां से निकलने के लिए काेशिश करेगा और कार स्टार्ट भी करेगा .इसलिए उन्हाेंने गलत नहीं किया ना ही कंपनी पैसा देने से बच सकती है. फाेरम ने सुधाकर काे एक महीने के अंदर 17.5 लाख सात प्रतिशत ब्याज के साथ देने के आदेश दिए

आप भी रखे यह सावधानी

– गाड़ी का इंश्याेरेंस नामी कंपनी से करवाए

– सभी नियम व शर्ते ध्यान से पढ़े

– इंश्याेरेंस पॉलिसी लेने के पहले संबंधित कंपनी के रिव्यू जरूर देखें.

– चालान से बचने के लिए कभी भी फर्जी बीमा न करवाए

– यदि इंश्याेरेंस कंपनी क्लेम देने से मना करती है ताे उसकी शिकायत उपभाेक्ता फाेरम में जरूर करे.

Related Articles

Back to top button