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स्वास्थ्य

कोरोना से कमजोर हुए तन को योग से बनाएं मजबूत, फेफड़े और दिल की सेहत के लिए रोजाना करें ये व्यायाम

नई दिल्ली I कोरोना संक्रमण व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर प्रभावित करता है। कोविड से ठीक हो जाने के बाद भी लोगों को दिल, फेफड़ों और पाचन तंत्र से जुड़ी कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर तीन योग विशेषज्ञ आपको बता रहे हैं कि कैसे योग की मदद से आप अपनी पोस्ट कोविड रिकवरी को तेज कर सकते हैं।

फेफड़ों के लिए क्या करें
फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए आसन के अलावा प्राणायाम भी बहुत जरूरी है। खासकर बीमार लोगों के लिए वशिष्ठ प्राणायाम बहुत कारगर है, क्योंकि इसे लेटकर किया जा सकता है। भ्रामरी और उज्जायी प्राणायाम भी बहुत कारगर हैं।

दरअसल हमारे शरीर में ऑक्सीजन का स्रोत फेफड़ा होता है जिसमें कई चैंबर होते हैं, लेकिन फेफड़ा या कोई अन्य अंग तभी मजबूत होगा जब वह गतिशील रहे। प्राणायाम और योगाभ्यास अंगों को गतिशील बनाकर उसे मजबूत करते हैं जैसे कि-प्राणायाम हमारे डायफ्राम को फैला देते हैं जिससे हम अधिक मात्रा में ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंचाते हैं। इससे फेफड़े के कम सक्रिय चैंबर भी खुल जाते हैं।

फेफड़े को मजबूत करने वाले खास आसनों में मुखासन, भुजंगासन, धनुर्आसन, विमान आसन, सेतुबंध आसन, चक्रासन और उष्ट्रासन शामिल हैं। लेकिन ये योगासन उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिन्हें कमर की समस्या है। प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में योगाभ्यास करना चाहिए।

हृदय को ताकत दें
योगाभ्यास का एक मकसद शरीर की मांसपेशियों को गतिशील बनाकर उन्हें लचकदार और मजबूत बनाना है, लेकिन योग का केवल यही लक्ष्य नहीं है। हृदय की बात करें तो इसे मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए शीर्षान का अभ्यास बहुत असरदार है। इसको करने से ह्दय को बहुत अधिक काम करना पड़ता है, इस दौरान दिल और धमनियां पूरी क्षमता के साथ करती हैं। इसके अलावा सूर्य नमस्कार, अधोमुख श्वान आसन और वज्रासन भी हृदय को सेहतमंद रखने में कारगर हैं।

ये आसन उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिन्हें किसी तरह की दिल की बीमारी है या जिनको हाईबीपी की दिक्कत हो। प्राणायाम से भी हृदय समेत पूरे शरीर को ऊर्जा मिलती है, जिससे अंग अच्छी तरह काम करते हैं।
-योगाचार्य अतुल कुमार वर्मा, योगात्रया

पाचन तंत्र संबंधी क्रियाएं
कोरोना संक्रमण के दौरान शारीरिक गतिविधियां ठप पड़ने और तनाव समेत अन्य कारणों से कई लोगों को ठीक होने के बावजूद भूख नहीं लगती। ऐसी स्थिती में पाचन तंत्र को मजबूती देने वाले योगाभ्यास कारगर हो सकते हैं।

मंडूक आसन, मयूर आसन, चक्रासन, नौकासन और वज्रासन। ये आसन पेट की जठराग्नि को तेज करने का काम करते हैं, जिससे भूख खुलती है। लेकिन ये आसन उन लोगों को नहीं करना चाहिए जो अल्सर, कोलाइटिस, हार्निया या अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं। गर्भवती महिलाएं भी इसका अभ्यास नहीं करें। इसके अलावा अमाशय की सफाई के लिए षटकर्म का भी विधान है जिसमें नौली, धौती (कुंजल) और कपालभाति शामिल हैं, इससे भी पाचन तंत्र ठीक रहता है।

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