Select your Language: हिन्दी
Jammu Kashmir

खत्म हुई जम्मू-कश्मीर में 149 साल पुरानी दरबार मूव प्रथा, इस प्रथा के खत्म होने से हर साल होगी 200 करोड़ रुपये की बचत

जम्मू-कश्मीर राज्य में 149 साल पुरानी दरबार मूव प्रथा आखिरकार खत्म हो गई. जम्मू कश्मीर सरकार ने कर्मचारियों को दिये जाने आवास आवंटन को समाप्त कर दिया है. जिसमे उन्हे अगले तीन महीने के भीतर आवास को  खाली करना होगा.

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इसका संकेत 20 जून को ही दे दिया था. 20 जून को उपराज्यपाल ने कहा था की प्रशासन ने ई-ऑफिस का काम पूरा कर लिया है. इसलिये सरकरी ऑफिसों के साल मे दो बार जगह बदलेन की कोई जरूरत नही है. जिसे दरबार मूव के नाम से जाना जाता है.

दरअसल सर्दी के मौसम में श्रीनगर में असहनीय ठंड पड़ती है तो गर्मी में जम्मू की गर्मी थोड़ी तकलीफदायक होती है। इसे देखते हुए गुलाब सिंह ने गर्मी के दिनों में श्रीनगर और ठंडी के दिनों में जम्मू को राजधानी बनाना शुरू कर दिया। राजधानी बदलने की यह परंपरा 1862 में डोगरा शासक गुलाब सिंह ने शुरू की थी। छह महीने राजधानी श्रीनगर में रहती है और छह महीने जम्मू में। राजधानी बदलने पर जरूरी कार्यालय, सिविल सचिवालय वगैरह का पूरा इंतजाम जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू ले जाया जाता था। इस प्रक्रिया को ‘दरबार मूव’ के नाम से जाना जाता है। राजधानी शिफ्ट करने की इस प्रक्रिया के जटिल और खर्चीला होने की वजह से इसका विरोध भी होता रहा है।

दरबार मूव एक बेहद जटिल काम था। इसमें सैकड़ों ट्रकों से ऑफिसों के फर्नीचर, फाइल, कंप्यूटर और अन्य रेकॉर्ड्स को शिफ्ट किया जाता था। बसों से सरकारी कर्मचारियों को शिफ्ट किया जाता था। मगर अब यह प्रथा खत्म होने से इन तमाम तरह के फिजूल खर्चों पर लगाम लगेगी। क्योकि एक बार राजधानी शिफ्ट होने में करीब 110 करोड़ रुपये का खर्च आता था।

Related Articles

Back to top button