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असम-मिजोरम: एक ही देश के दो राज्यों में दूसरे देशों जैसा तनाव! एक इंच भी जमीन नहीं देने की दी चेतावनी

पिछले दिनों से असम – मिजोरम के हालत ठीक नहीं है । दोनों राज्यों के बीच सीमा पर अब भी तनाव बना हुआ है। दोनों के बीच सीमा विवाद को लेकर खूनी झड़प होने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हैं।
लेकिन अब इस बीच असम सरकार ने मिजोरम की सीमा पर 4,000 सैनिकों की तैनाती का फैसला लिया है। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से दोनों राज्यों के बीच तनाव को खत्म करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने बुधवार को असम और मिजोरम के मुख्य सचिवों और डीजीपी की बैठक बुलाई है। इस मीटिंग में दोनों राज्यों के बीच शांति का फॉर्मूला निकालने पर बात होगी। इस विवाद को लेकर कल संसद में गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि कोइ भी मतभेद बातचीत और आपसी सहयोग से ही सुलझ सकते हैं। केंद्र सरकार इन विवादों को हल करने के लिए मध्यस्थ के तौर पर अपनी भूमिका निभा सकती है।

इसके अलावा असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने सख्त होते हुवे कहा कि वह असम की एक इंच जमीन भी पड़ोसी राज्यों की ओर से अतिक्रमण नहीं होने देंगे। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि वह इनर लाइन फॉरेस्ट रिजर्व में अतिक्रमण का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। और मिजोरम सीमा पर 4,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी। असम के सीएम ने यह भी कहा, ‘सैटलाइट इमेजों से पता चलता है कि झूम खेती के लिए सड़कों का निर्माण किया जा रहा है और जंगल साफ कर दिया गया है। सीमा के आसपास यह काम किया जा रहा है, जिसकी परमिशन नहीं दी जा सकती। हम सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे ताकि जंगलों की सुरक्षा की जा सके।

वहीं सीआरपीएफ के सूत्रों का कहना है कि फोर्स की ओर से हिंसा प्रभावित इलाकों में शांति स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंगलवार को सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने सीनियर अफसरों की एक मीटिंग बुलाई थी, जिसमें हिंसा वाले इलाकों में शांति स्थापित करने को लेकर बात की गई।

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