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सिर्फ दिल्ली में ही सुप्रीम कोर्ट के होने पर बोले रिटायर जज, ये बड़ा अन्याय, केंद्र करे विचार

मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस एन किरुबाकरण ने गुरुवार को कहा कि सिर्फ नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट रखना उन सभी लोगों के साथ बड़ा अन्याय है जो उसके आस पास नहीं रहते। उनका क्या कसूर जो दिल्ली से काफी दूर रहते हैं।इस बात को लेकर मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस एन किरुबाकरण ने चिंता जाहिर की है। इस बात को लेकर उन्होंने केंद्र से सिफारिश की है कि वह इस बात पर पुनर्विचार करे।उन्होंने शीर्ष अदालत से देशभर में रीजनल बेंच स्थापित करने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

मद्रास हाई कोर्ट के सीनियर जजों में से एक जस्टिस किरूबाकरण शुक्रवार को रिटायर हो गए। उन्होंने यह टिप्पणी उनके लिए आयोजित एक विदाई समारोह में गुरुवार को की। अपने भाषण में उन्होंने कहा, “नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट का होना अधिकांश लोगों के साथ अन्याय है। ऐसा कहा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक पक्ष में रीजनल बेंच की स्थापना को खारिज कर दिया था। मुझे उम्मीद है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट निर्णय पर पुनर्विचार करेगा और रीजनल बेंच की स्थापना की अनुमति देगा।”

जज ने कहा, “न्यायपालिका में, दिल्ली और बॉम्बे शक्ति केंद्र हैं। सुप्रीम कोर्ट में राज्यों का ठीक से प्रतिनिधित्व नहीं है। ” जज ने यह भी कहा कि अगर यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा नहीं उठाया जाता, तो केंद्र को रीजनल बेंच स्थापित करने के लिए संविधान में संशोधन करना चाहिए। नागरिक मुद्दों और जनहित के मामलों के प्रति उनके लोकप्रिय और सक्रिय दृष्टिकोण के लिए जाने जाने वाले जस्टिस किरुबाकरण को 31 मार्च, 2009 को हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और 2011 में वे स्थायी न्यायाधीश बनाए गए थे।

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