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यूँ तुरंत नहीं ख़त्म होगा तीनों कृषि क़ानून, लंबी प्रक्रिया के बाद होगा समाधान

आज देश के प्रधानमंत्री ने देश के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। जिसके बाद आंदोलन करा रहे किसान सिंघु बॉर्डर पर जश्न मनाते दिखे। प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान कर दिया है कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएंगे। देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवास‍ियों से क्षमा मांगते हुए कृष‍ि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की और आंदोलनरत क‍िसानों से घर-खेत-पर‍िवार के बीच लौटने की अपील की।

लोगों को लगा कि अब तो आंदोलन ख़त्म हो जाएगा। लेक‍िन, आंदोलनकारी क‍िसानों के नेता राकेश ट‍िकैत ने कहा क‍ि ‘आंदोलन अभी खत्‍म नहीं होगा। उन्‍होंने कहा जब संसद से कानून वापस हो जाएगा, तब मानेंगे। अभी तो केवल घोषणा हुई है।’ ट‍िकैत ने कहा क‍ि ‘सरकार और क‍िसानों के बीच बातचीत का भी रास्‍ता खुले और एमएसपी सह‍ित हमारे अन्‍य मुद्दों पर न‍िर्णय हो।’

प्रधानमंत्री के कृषि क़ानून के वापस लेंने के ऐलान करने के बाद वो कौन सी प्रक्रिया है जिसका जिक्र पीएम मोदी ने भी अपने संबोधन में किया।

आइये जानते है कौन सी वो प्रकिया है जिसके बाद ही तीनों कृषि क़ानून ख़त्म होंगे
सबसे पहले तो 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के सत्र में कानून रद क‍िए जाने का प्रस्‍ताव लाया जाएगा। ज‍िस कानून को रद्द क‍िया जाना है, उससे संबंध‍ित एक प्रस्‍ताव तैयार क‍िया जाता है और इसे कानून मंत्रालय को भेजा जाता है। उसके बाद कानून मंत्रालय प्रस्‍ताव का अध्‍ययन करता है और सारे कानूनी पहलुओं की जांच-परख करता है। फिर ज‍िस मंत्रालय से संबंध‍ित कानून है, उसकी ओर से उसे वापस ल‍िए जाने संबंधी ब‍िल सदन में पेश क‍िया जाएगा। वहाँ ब‍िल पर सदन में बहस और बहस के बाद मतदान कराया जाएगा। अगर कानून वापस ल‍िए जाने के समर्थन में ज्‍यादा मत पड़े तो कानून वापस ल‍िया जा सकेगा। और अंत में अगर सदन से प्रस्‍ताव पार‍ित हो गया तो राष्‍ट्रपत‍ि की मंजूरी के ज‍र‍िए कानून रद कि‍ए जाने की अध‍िसूचना जारी हो जाएगी।

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