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राजनैतिक

कांग्रेस को पछाड़ टीएमसी बन सकती है बड़ी पार्टी, बंगाल से बाहर पैर पसारने की तैयारी में ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की स्थानिक पार्टी तृणमूल कांग्रेस अब पूरे भारत की राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को पीछे छोड़ती हुई नजर आ रही है। आज ही मेघालय के पूर्व सीएम मुकुल संगमा ने कांग्रेस के 11 विधायकों के साथ टीएमसी का दामन थाम लिया है।। इससे अलावा अन्य राज्यों से भी जैसे गोवा, बिहार, हरियाणा, यूपी के अलावा पूर्वोत्तर भारत में भी टीएमसी त्रिपुरा और मेघालय जैसे राज्यों में मुख्य विपक्षी दल बनने की स्थिति की खबर आ रही है। इससे पहले भी बीते दिन बिहार कांग्रेस के सीनियर नेता कीर्ति आजाद ने भी राहल का साथ छोड़ दिया और वे भी ममता के साथ हो लिए। इसके बाद हरियाणा में भी कभी राहुल गांधी के करीबी रहे अशोक तंवर ने भी टीएमसी का दामन थाम लिया। तो वहीं जेडीयू के पूर्व सांसद पवन वर्मा भी टीएमसी में शामिल हो गए हैं। इन सबके बाद भाजपा के भी राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने भी ममता बनर्जी से मुलाकात की है और अब मोदी सरकार को फेल करार दिया है। उनसे जब यह प्रश्न किया गया कि क्या वह भी टीएमसी में शामिल होने वाले हैं तो उनका जवाब था कि वह तो पहले से ही उसमें शामिल हैं। इससे साफ संकेत मिल रहा है आने वाले समय में वह भी पाला बदल सकते हैं।

लेकिन सवाल यह भी है कि बंगाल में भले ही टीएमसी बड़ा जनाधार रखती है, लेकिन हरियाणा, बिहार और यूपी जैसे राज्यों में उसका कोई दखल नहीं है। फिर भी कई सीनियर नेता उसमें क्यों शामिल हो रहे हैं?

अब अगर टीएमसी के बारे में बात की जाये तो उसके लिए यह फ़ायदा है कि इससे पार्टी की साख बढ़ेगी और उन राज्यों में भी अपनी धाक जमाने का मौका मिल जाएगा, जहां उसका कोई जनाधार नहीं है। इसलिए टीएमसी उन राज्यों पर नजर है, जहां कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है और कांग्रेस ही सबसे कमजोर है। और पार्टी में भी नेताओं की उपेक्षा हो रही है। इसके अलावा यूपी और बिहार जैसे राज्यों में भी वह कांग्रेस की जगह लेना चाहती है क्योंकि वहां उसके नेता उपेक्षित हैं और वे किसी ऐसे ठिकाने की तलाश में हैं, जो वैचारिक तौर पर करीबी भी हो।

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